विशाखापत्तनम : तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) सांसद जेसी दिवाकर रेड्डी ने देरी से पहुंचने पर हैदराबाद जाने वाले विमान में एयरलाइन द्वारा प्रवेश नहीं देने के बाद हवाई अड्डे पर हंगामा किया. सांसद ने एक कर्मचारी को धक्का दिया तथा एक प्रिंटर को जमीन पर फेंक दिया. इस हंगामे के बाद इंडिगो सहित कई विमान कंपनियों ने दिवाकर रेड्डी की हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया. इंडिगो ने सांसद को हालांकि उसी फ्लाइट में भेजा लेकिन उसने बाद में सांसद पर उनकी फ्लाइटों में प्रतिबंध लगाने का फैसला किया. सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया ने भी रेड्डी पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है. केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू भी टीडीपी के ही सदस्य हैं. इंडिगो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेड्डी को अब इंडिगो की विमान सेवा की सुविधा नहीं लेने दी जाएगी. बाद में एयर इंडिया, स्पाइस जेट और जेट एयरवेज ने भी सांसद की हवाई यात्रा पर रोक लगाने का फैसला किया. एयरलाइन के अनुसार, उन्हें इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई 608 से यात्रा करनी थी जिसे सुबह 8.10 बजे विशाखापत्तनम हवाई अड्डे से हैदराबाद रवाना होना था, लेकिन वह प्रस्तावित रवानगी से केवल 28 मिनट पहले पहुंचे. उड्डयन नियामक डीजीसीए के नियमों के अनुसार, एयरलाइंस रवानगी से 45 मिनट पहले सभी घरेलू उडानों के लिए चेक इन काउंटर बंद कर देती हैं. पिछले साल उन्होंने इसी कारण से फ्लाइट छूट जाने पर विजयवाडा में गणवरम हवाई अड्डे पर एयर इंडिया कार्यालय में कथित रूप से फर्नीचर तोड़ दिया था. टीवी न्यूज़ चैनलों ने उनकी सीसीटीवी तस्वीरें दिखाईं जिसमें वह इंडिगो के एक कर्मचारी को कथित रूप से धक्का दे रहे थे. इंडिगो ने एक बयान में कहा, कर्मचारी ने उन्हें शिष्टता से जानकारी दी कि उडान 6ई 608 में बोर्डिंग बंद हो चुकी है और उन्होंने रेड्डी को बाद वाली फ्लाइट में व्यवस्था करने का प्रस्ताव दिया. रेड्डी ने नाराजगी जताई और आक्रामक एवं अभद्र व्यवहार करते हुए कर्मचारी के खिलाफ गुस्सा निकाला. गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना सांसद रविंद्र गायकवाड ने मार्च 2017 में एयर इंडिया के विमान में एक कर्मचारी के साथ मारपीट की थी. सांसद ने खुद बताया था कि उन्होंने चप्पल से कर्मचारी को पीटा है, जिसके बाद काफी बवाल हुआ था. सभी एयरलाइंस ने सांसद पर ट्रैवल बैन लगा दिया था. मामला संसद में पहुंचा और संबंधित मंत्रालय से माफी मांगने के बाद ही उन पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया था. इसके बाद मंत्रालय की ओर से हंगामा करने वाले यात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी की गई थीं.