राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है. इस वक्त सियासी हलकों में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा गर्म है. ऐसे में यह देखना होगा कि नए राष्ट्रपति का चुनाव सबकी सहमति से होगा या सरकार और विपक्ष अपने-अपने उम्मीदवार उतारेंगे. बहरहाल, तमाम अटकलों के बीच चुनाव आयोग ने ऐलान कर दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होगा. राष्ट्रपति चुनाव एकल वोटिंग अधिकार के हिसाब से होंगे. इसमें हर वोट का वजन अलग-अलग अनुपात में माना जाएगा. राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य वोट करते हैं. फिलहाल लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 233 सदस्य हैं. इसके अलावा देश की सभी विधानसभाओं के 4120 सदस्य भी राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करेंगे. इनमें दिल्ली और पुडुच्चेरी के विधायक भी शामिल हैं. मतदाता सूची में हर सांसद और विधायक के वोट की ताकत अलग-अलग होती है. इसके साथ ही हर राज्य का सांसद और विधायक के वोटों की कीमत में भी अंतर होता है. सांसद या विधायक के वोट की कीमत उसके राज्य की 1971 की आबादी के हिसाब से तय किया जाता है. मिसाल के तौर पर यूपी के विधायक के वोट का मूल्य 208 है. वहीं सिक्किम के विधायक के वोट का मूल्य महज 7 है. सभी विधायकों के वोटों का मूल्य उतना ही होता है, जितना सभी सांसदों के वोटों का मिलाकर होता है. एक विधायक के वोट की कीमत का निर्धारण- 1971 में विधायक के राज्य की आबादी/ राज्य के विधायकों की संख्या गुणा 1000 से होता है. एक सांसद के वोट की कीमत का निर्धारण- राज्य के विधायकों के वोटों का मूल्य/776 (सांसदों की संख्या) से होता है. राष्ट्रपति चुनाव में हर मतदाता एक ही वोट देता है. वो हर उम्मीदवार को लेकर अपनी प्राथमिकता बता सकता है. हर वोट की गिनती के लिए कम से कम एक उम्मीदवार के नाम का समर्थन जरूरी होता है. किसी भी प्रत्याशी को जीतने के लिए तयशुदा कोटे के वोट हासिल करने होते हैं. अगर पहले दौर में कोई नहीं जीतता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को चुनाव मैदान से बाहर कर दिया जाता है. फिर उसके हिस्से के वोट, दूसरी प्राथमिकता वाले प्रत्याशी के खाते में डाल दिए जाते हैं. इसके बाद भी कोई नहीं जीतता, तो यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है, जब तक कोई उम्मीदवार जीत के लिए तय कोटे के बराबर वोट हासिल नहीं कर लेता या एक-एक कर के सारे उम्मीदवार मुकाबले से बाहर हो जाएं और सिर्फ एक प्रत्याशी बचे. राष्ट्रपति चुनाव (जुलाई 2017) हम यह मानकर चलते हैं कि जुलाई 2017 तक कोई भी विधानसभा भंग नहीं की जाएगी. कोई विधायक अपनी पार्टी नहीं छोड़ेगा. सभी गठबंधन राष्ट्रपति चुनाव तक ऐसे ही रहेंगे. हर विधायक और सांसद अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए ही वोट करेगा. राष्ट्रपति चुनाव में सभी 776 सांसद और देश भर के 4120 विधायक वोट डालेंगे. पहली सूची में हर विधायक और सांसद के वोट का मूल्य बताया गया है. कोटे का निर्धारण कैसे होता है? राष्ट्रपति चुनाव के कुल मतदाताओं के वोटों के मूल्य को दो से भाग देकर उसमें एक जोड़ा जाता है. इसी से जीत के लिए कोटा तय होता है.