यूरोपियन कोर्ट के रास्ते बचने की फिराक में है अबू सलेम

साल 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट में दोषी डॉन अबू सलेम बचने के लिए अलग हथकंडा अपना रहा है. वह अब यूरोपियन कोर्ट पहुंच गया है और वहां भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है. बता दें कि सलेम ने तीन महीने पहले ही यूरोपियन कोर्ट में अप्रोच किया था. पुर्तगाल से ट्रायल के लिए प्रत्यर्पित सलेम ने याचिका दायर करके वहां वापस लौटने की मांग की है. उसने तर्क दिया है कि पुर्तगाल कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण के साल 2014 के आदेश को समाप्त कर दिया है. ऐसे में भारत में हुआ उसका पूरा ट्रायल गैर कानूनी है.
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अपने अप्लीकेशन में सलेम ने अपने जीवन के दो प्रयासों का विवरण दिया है. पहला जून 2010 का, जिसमें वह 1993 मुंबई ब्लास्ट में मुस्तफा डोसा के साथ आरोपी है. और दूसरा एक अन्य कारावास में. सलेम ने इससे पहले तर्क दिया था कि उसके ऊपर ऐसे चार्ज लगाए जा रहा हैं, जिसके बारे में उसकी प्रत्यर्पण संधी में उल्लेख नहीं है. सलेम के प्रत्यर्पण की संधी में कहा गया है कि न तो उसे मौत की सजा दी जा सकती है और न ही 25 साल से ज्यादा उम्र कैद की सजा. मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में उसे उम्र कैद की सजा मिली है, जिसके बाद वह पुर्तगाल कोर्ट पहुंचा. इसके बाद पुर्तगाल की लोकल कोर्ट ने अपील को बरकरार रखा था. उसका केस वहां की सुप्रीम कोर्ट में अब भी चल रहा है. सलेम के एक वकील सुदीप पासबोला ने कहा, याचिका फाइल होने के बाद पुर्तगाल सरकार और भारत सरकार को नोटिस जारी किया गया था. इस मामले में पुर्तगाल सरकार ने पहले ही जवाब दे दिया है. कुछ एडिशनल डॉक्युमेंट अभी देने बाकी हैं. उनके वकील ने कहा, प्रत्यर्पण संधी पर पुर्तगाल सरकार ने उसे वापस बुलाने के लिए अब तक कोई कॉल नहीं किया है.

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