लखनऊ। सपा विधानमंडल दल के  नेता अखिलेश यादव ने शुक्रवार को विधान परिषद में कहा कि नौ महीने में कोई काम न करने वाली योगी सरकार समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए ही उप्र संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2017 (यूपीकोका) जैसा काला कानून लेकर आयी है। उन्होंने कहा कि नौ महीने में सरकार की नीयत पता चल गई है। सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने, पुलिस-प्रशासन के माध्यम से प्रदेश में अन्याय करने और अपनी राजनीतिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यूपीकोका लागू करना चाहती है। अखिलेश ने यूपीकोका के लिए कहा- राजनीतिक विरोध रोकने और समस्याओं से ध्यान हटाने... विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में पहली बार शुक्रवार को उच्च सदन में आये अखिलेश ने यूपीकोका की आड़ लेकर योगी सरकार पर जमकर तीर चलाए। सहारनपुर में पुलिस कप्तान के साथ भाजपा सांसदों व समर्थकों की बदसलूकी, बुलंदशहर में महिला पुलिस अधिकारी से भाजपा नेता का दुव्र्यवहार और सपा के दो जिला पंचायत सदस्यों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 लगाने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने आपका जादू देख लिया है। आपकी सरकार सबसे ज्यादा कानून व्यवस्था को लेकर ही कठघरे में खड़ी है। यह भी कहने से नहीं चूके कि अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने आने वाले आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं व शिक्षामित्रों पर अंकुश लगाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया जाएगा। यह कानून प्रेस और सोशल मीडिया पर भी शिकंजा कसेगा। कहा कि सरकार कानून तो लाना चाहती है लेकिन तकनीक से भाग रही है। यदि सरकार को कानून व्यवस्था सुधारने की इतनी ही चिंता है तो वह डायल 100 और 1090 सेवा को दुरुस्त करे।  अखिलेश ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री आवास के सामने सेल्फी खींचने की मनाही वाला बोर्ड क्यों हटवा दिया गया। फिर कहा कि यह लोग तो सेल्फी खींचने पर भी यूपीकोका लगा सकते हैं। सपा मुखिया ने कहा कि बातें बनाने वाली भाजपा सरकार एक यूनिट बिजली नहीं बना पायी। उसने नौजवानों से पुलिस की 40 हजार भर्तियां छीनीं। भाजपा राज में आलू किसान तबाह हैं और धान खरीद की असलियत खुद सरकार जानती है। 

भेद नीति पर खूब चले अखिलेश 

विधान परिषद में सरकार पर हमलावर रहते सपा मुखिया ने भेद नीति का खूब अनुसरण किया। सदन में पहली बार आये उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुखातिब होकर बोले कि यह डिप्टी सीएम हैं जरूर लेकिन आपके पास कोई काम नहीं हैं। आप हमारी तरह विपक्ष में हैं। यह तक कहने से नहीं चूके कि शास्त्री भवन स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय से आपके नाम की तख्ती हटा दी गई थी, कमरा भी खाली कराया गया था। पिछड़ा कार्ड खेलते हुए अखिलेश ने कहा कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। फिर कहा कि आपके सीएम जिस तरह से काम कर रहे हैं, उससे हमें सरकार बनाने का मौका जरूर मिलेगा। आप इसमें हमारा सहयोग करिये। वहीं उन्होंने उप मुख्यमंत्री और नेता सदन डॉ.दिनेश शर्मा से कहा कि आप इस विधेयक को वापस लेने की हिम्मत दिखाइये। हम आपके साथ हैं। 

अफसर किसी के नहीं

अखिलेश ने सत्ता पक्ष को आगाह किया कि सरकार यूपीकोका को लेकर अफसरों के हाथों में खेल रही है। यह कहते हुए कि अफसर किसी के नहीं होते, सरकार बदलते ही बदल जाते हैं। इसलिए वे आइएएस कहलाते हैं यानी ‘इनविजिबल आफ्टर सरकार’। अफसर चुपचाप कुछ आपको बताते हैं, उससे ज्यादा हमें बताते हैं क्योंकि उन्होंने हमारे साथ ज्यादा काम किया है। 

नीति और नीयत ठीक रहे तो नये कानून की जरूरत नहीं

उच्च सदन में बसपा के नेता सुनील चित्तौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार की नीति और नीयत यदि ठीक रहती तो यूपीकोका जैसे नये कानून की जरूरत ही नहीं पड़ती। पूरे प्रदेश में हिंदू वाहिनी, हिंदू जागरण मंच और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भय का माहौल बना रहे हैं लेकिन सरकार को उनकी अराजकता नहीं दिखायी देती। उन्होंने कहा कि सरकार को उखाड़ फेंकने वालों पर ही यूपीकोका लगेगा। 

अंग्रेजी दौर के कानूनों की यादें ताजा

कांग्रेस के नेता दीपक सिंह ने कहा कि यूपीकोका अंग्रेजी दौर के काले कानूनों की यादें ताजा कर रहा है। यह कानून ब्रिटिश हुकूमत की ओर से लाये गए वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट और रोलेट एक्ट का मिलाजुला स्वरूप है।