लखनऊ : समाजवादी पार्टी में जारी टकरार ने अब दरार का रूप ले लिया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को छह साल के लिए बाहर निकाल दिया. टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में झगड़ा बढ़ गया था.

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मुलायम और अखिलेश ने अलग-अलग सूची जारी कर दी थी. रही सही कसर रामगोपाल ने पूरी कर दी. मुलायम सिंह ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय अधिवेशन सिर्फ अध्यक्ष बुला सकता है रामगोपाल नहीं. उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गयी और उन्हें निकाल दिया गया. पार्टी से निकाले जाने के बाद अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास आगे कई रास्ते हैं वो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और अपनी नयी पार्टी बनाने का एलान कर सकते हैं. विधानसभा भंग कर चुनाव की सिफारिश कर सकते हैं. राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है, हालांकि राज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि राज्य में कोई संवैधानिक संकट नहीं है. अगर अखिलेश बहुमत साबित करने की ओर आगे बढ़ते हैं तो कई ऐसे विधायक हैं जो अखिलेश के साथ हैं. यह दावा किया जा रहा है कि अखिलेश को 175 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. उन्हें 27 विधायकों का समर्थन और प्राप्त करना होगा, जो शायद कांग्रेस से मिल भी जाये. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम सिंह यादव ने कहा कि मैं अभी पूरी तरह स्वस्थ हूं. मैंने फिर भी अखिलेश को आगे किया. वो गलत लोगों के साथ हो गये हैं. रामगोपाल ने उनका भविष्य बर्बाद कर दिया है. मुलायम ने कहा, मैं इन लोगों से ज्यादा रैलियां करता हूं. इनसे ज्यादा लोगों से मुलाकात करता हूं अब कयास लगाये जा रहे हैं कि अगर अखिलेश अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ते हैं तो न सिर्फ पार्टी बल्कि पार्टी का जनाधार भी बंट जायेगा. अगर अखिलेश चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो मुलायम हाशिये पर जा सकते हैं अौर राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका दबदबा धीरे-धीरे खत्म हो सकता है.