यांगून

म्यांमार के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में कई हजार बच्चों के गंभीर कुपोषण से ग्रसित होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि यहां बच्चों के इलाज के लिए मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, सेना द्वारा संदिग्ध रोहिंग्या चरमपंथियों पर जो सैन्य कार्रवाई की गई, उसकी चपेट में आने वाले परिवारों और बच्चों को जरूरी सहायता भी उपलब्ध नहीं कराई गई। UN के मुताबिक, बेहद गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों को कोई मेडिकल सहायता नहीं मिल पा रही है और इसके कारण हजारों बच्चों की जान दांव पर लगी हुई है। ज्यादातर पीड़ित बच्चे रोहिंग्या समुदाय के ही हैं। बांग्लादेश से सटी सीमा के पास एक आर्मी पोस्ट पर हुए हमले में 9 पुलिसकर्मियों की हत्या के जवाब में सेना ने यह कार्रवाई शुरू की थी। कार्रवाई के मद्देनजर रहाइन शहर के उत्तरी हिस्से में स्थित दो इलाकों को सेना ने सीलबंद कर दिया। पिछले कुछ समय से बर्मा में हो रहे सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की वारदातों का सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों पर पड़ा है। धार्मिक हिंसा के मामले में रहाइन स्टेट बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रोहिंग्या मुस्लिमों को रहाइन के बौद्धों से भारी नफरत का सामना करना पड़ रहा है। वे नहीं चाहते कि इस समुदाय को किसी भी तरह का कोई नागरिक अधिकार मिले। ये इन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रावसी कहते हैं।