ढ़ोंगी बाबाओं की कतार में एक और नाम जुड़ गया है। आरोपों के मुताबिक ये नया बाबा पिछले वक़्त में गुज़रे तमाम बाबाओं से भी चार हाथ आगे हैं। बाकी बाबाओं की तरह इन्होंने भी खुद भगवान तो घोषित कर ही रखा है। मगर ये भगवान होने के साथ ये दलील देता था कि उसके आश्रम की सभी लड़कियां उसकी 16 हज़ार रानियां हैं। दिल्ली के इस ‘राम रहीम’ का नाम है वीरेंद्र देव दीक्षित, जो खुद को अध्यात्म गुरु कहता है। इस बाबा की कहानी बड़ी अजीब है। आश्रम से छूटी लड़कियों ने बताया बाबा वीरेंद्र का घिनौना सच, सुनकर हिल जाएंगे आप ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि दिल्ली के रोहिणी इलाके में इस अध्यात्मिक विश्वविद्यालय में भोली-भाली लड़कियों और मासूम बच्चियों का आस्था के नाम पर सालों से शोषण हो रहा था. वो भी सरकार की नाक के नीचे,  मगर खुलासा अब जाकर हुआ है।दिल्ली जैसे बड़े शहर में आस्था के नाम पर चल रहे अय्याशी के इस खेल की पूरी कहानी जानेंगे तो हैरानी होगी।आश्रम से छूटी लड़कियों ने बताया बाबा वीरेंद्र का घिनौना सच, सुनकर हिल जाएंगे आप तेलंगाना के रहने वाले पिता ने बताया कि मेरी बेटी अमेरिका में पीएचडी कर रही थी। जुलाई, 2015 में अचानक उसका फोन आया कि वह दिल्ली के एक आश्रम में आ गई है। लेकिन जब मैं विजय विहार की आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी पहुंचा तो मुझे 4 घंटे तक बिठाया गया। जब मैं बेटी से मिला तो मेरे सामने बेटी आई बिल्कुल बुत की तरह शांत खड़ी थी। वो बोल नहीं पा रही थी। बाबा के लोग मुझे और उसे घेरे खड़े रहे। मेरी बेटी के साथ जरूर कुछ गलत हुआ था। आश्रम से छूटी लड़कियों ने बताया बाबा वीरेंद्र का घिनौना सच, सुनकर हिल जाएंगे आपबाबा की एक पूर्व सेविका की माने तो आध्यात्मिक स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी के पहले माउंट आबू के ब्रह्मकुमारी से बाबा जुड़ा था। बाबा ने खुद को उनसे अलग कर लिया था। बाबा के साथ शिष्याओं और  चार पुरुष चेले भी चलते थे। जो लड़कियां बाबा की बात नहीं मानती थी, उनको बाबा के लोग मारते-पीटते थे। साथ ही गंदा काम करते है। इसके साथ ही जो लड़कियां आश्रम में किसी कारण से मर जाती थीं। तो उन्हें रात रात के अंधेरे में कहीं ले जाकर जला दिया जाता था देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी में बने इस आध्यत्मिक विश्वविद्यालय का सच सामने आया तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई। ऊंची-ऊंची दीवारों के बीच इस यूनिवर्सिटी में सेक्स का खेल चल रहा था। मासूम लड़कियों के साथ खिलवाड़ हो रहा था। इस इमारत को चारों ओर से ग्रिल से जकड़ा गया है। जिसमें बिना इजाज़त कोई परिंदा भी यहां पर न मार सके।