दार्जिलिंग मुद्दे में बड़ा मोड़, GNLF ने छोड़ा ममता का साथ

दार्जिलिंग में चल रहे राजनीतिक संकट ने नया मोड़ ले लिया है जहां जीएनएलएफ ने आंदोलन में जीजेएम से हाथ मिलाने के बाद टीएमसी से गठबंधन तोड़ लिया है. पार्टी ने कहा कि वह गठन के बाद से ही गोरखालैंड के लिए लड़ रही है. गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट के साथ गठबंधन से उत्साहित गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरूंग ने अलग गोरखालैंड के लिए आंदोलन को तेज करने की धमकी दी. वहीं सरकारी कार्यालयों और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के कार्यालयों में आज तीसरे दिन भी बंद रहा.

तेज तर्रार नेता सुभाष घिसिंग के नेतृत्व में बने जीएनएलएफ ने अस्सी के दशक में गोरखालैंड के लिए हिंसक आंदोलन की शुरुआत की थी जिसके बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल का गठन किया गया था. गुरूंग जीएनएलएफ से अगल हो गए थे और 2007 में जीजेएम की स्थापना की थी और इसके बाद वह पहाड़ों में बड़ी ताकत के रूप में उभरे थे.

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जीएनएलएफ के प्रवक्ता नीरज जिम्बा ने बताया कि सुभाष घिसिंग के नेतृत्व में अस्सी के दशक में जीएनएलएफ की स्थापना के बाद से ही यह गोरखालैंड के लिए संघर्ष कर रहा है. हमारा अंतिम लक्ष्य अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को हासिल करना है. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन कभी भी राजनीतिक या विचारधारा के स्तर पर नहीं रहा बल्कि चुनावी गठबंधन था.

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जिम्बा ने बताया कि टीएमसी उपहार और दाने के माध्यम से गोरखालैंड की वास्तविक मांग से ध्यान भटका रही है. बंद के आह्वान के बावजूद दिन में दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, कसर्यिांग और मिरिक में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है जबकि राज्य सरकार के कार्यालय बंद रहे. वहीं बैंक और अधिकतर एटीएम बंद रहे लेकिन दुकानें और बाजार खुले रहे.

अधिकतर पर्यटक पहाड़ों से जा चुके हैं और होटल खाली हैं। होटल मालिकों ने पर्यटकों से कहा है कि वे लेकिन जोखिम पर रुके सकते हैं. जीजेएम के कार्यकर्ता कसर्यिांग में खाद्य और आपूर्ति कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वहां से हट गए.

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