कराची। पाकिस्तान ने आर्थिक गलियारे के लिए धन जुटाने को लेकर अप्रत्याशित कदम उठाया है। उसने चीनी कंपनियों के समूह को 85 मिलियन डॉलर (8.96 अरब रुपये) में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की 40 फीसद इक्विटी बेची है।

बढ़ जायेगा चीन का हस्तछेप

इस कदम से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में चीन का हस्तक्षेप बहुत बढ़ जाएगा। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा में गुलाम कश्मीर का हिस्सा भी शामिल है। इसलिए भारत शुरुआत से ही इसका विरोध करता रहा है।

कंपनियों के समूह में चाइनीज फायनेंशियल फ्यूचर्स एक्सचेंज कंपनी लिमिटेड (बोली लगाने वाली मुख्य कंपनी), शंघाई स्टॉक एक्सचेंज, शेनझेन स्टॉक एक्सचेंज और दो स्थानीय कंपनियों पाक-चाइना इन्वेस्टमेंट कंपनी और हबीब बैंक शामिल हैं।

कंपनियों ने 28 रुपये प्रति शेयर की दर से पीएसएक्स के 32 करोड़ शेयर खरीदे हैं। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज इंफ्रास्ट्रक्चर बांड भी जारी करने वाला है। इसका उद्देश्य चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए धन जुटाना है। वित्त मंत्री ने इस मौके पर पाकिस्तान विकास कोष गठित करने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतररष्ट्रीय वित्त निगम के अलावा कुछ अन्य संगठनों ने भी विकास कोष का हिस्सा बनने का संकेत दिया है।

इशाक डार ने कहा कि चीनी कंपनियों के साथ संपन्न करार सपने का हकीकत में बदलने जैसा है। उन्होंने पाकिस्तानी पूंजी बाजार में चीनी कंपनियों की उपस्थिति को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। पाकिस्तान में चीन के राजदूत सुन वेईदोंग के मुताबिक इस समझौते से आर्थिक गलियारे के लिए फंड जुटाने में मदद मिलेगी।