दार्जिलिंग में गोरखा मोर्चा का प्रदर्शन हिंसक हो गया है. गोरखा मोर्चा ने दावा किया है कि पुलिस फायरिंग में दो समर्थक की मौत हो गई. वहीं पांच लोग घायल हुए हैं. हालांकि, पुलिस ने किसी भी तरह की फायरिंग की पुष्टि नहीं की है. ममता बनर्जी ने कहा, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का आतंकियों से संबंध है. वहां साजिश के तहत हिंसा कराई जा रही है. छठे दिन भी जारी है हिंसा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) द्वारा आहूत अनिश्चितकालीन बंद शनिवार को छठे दिन भी जारी है. इसके चलते उत्तरी पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है. राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और जीजेएम के बीच चल रहे घमासान के चलते दार्जिलिंग की वादियों में अशांति व्याप्त है. छापेमारी का आरोप जीजेएम के सहायक महासचिव बिनय तमंग ने दावा किया कि पुलिस और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार रात करीब तीन बजे उनके घर में भी उसी प्रकार छापेमारी और तोड़फोड़ की, जैसे दो दिन पहले उन्होंने पार्टी प्रमुख बिमल गुरंग के घर पर की थी. तमंग ने साथ ही दावा किया कि पुलिस ने जीजेएम के विधायक अमर राय के बेटे को भी गिरफ्तार कर लिया है. जबकि उसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. पत्रकार की गिरफ्तारी पर नाराजगी तमंग ने एक बयान में कहा, 'हम स्तब्ध हैं कि पिछली रात एक स्थानीय पत्रकार विक्रम राय को गिरफ्तार कर लिया गया. राय कोलकाता के कई मीडिया संस्थानों से जुड़े हैं. वह एक टेलीविजन चैनल के लिए स्ट्रिंगर के रूप में भी काम कर चुके हैं. अगर दार्जिलिंग में स्थानीय पत्रकार तक सुरक्षित नहीं हैं तो कौन हो सकता है.' उन्होंने कहा, 'दार्जिलिंग में आभासी आपातकाल लागू कर दिया गया है.' बम फेंकने का आरोप वहीं, तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता देवराज गुरंग ने दावा किया कि जीजेएम समर्थकों ने लेबोंग कार्ट रोड स्थित उनके आवास पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके. जीजेएम समर्थकों ने कथित तौर पर पंखाबाड़ी में एक स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ता के आवास पर हमला किया और बिजोनबाड़ी में पीडब्ल्यूडी के कार्यालय में आग लगा दी. पर्यटन पर बुरा असर दार्जिलिंग में जारी हिंसा का पर्यटन पर भी बुरा असर पड़ा है. एक रेल अधिकारी के मुताबिक, यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के मद्देनजर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की टॉय ट्रेन सेवा भी स्थगित कर दी गई है. जीजेएम ने सरकारी स्कूलों में बांग्ला भाषा को अनिवार्य किए जाने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले के विरोध में पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग एवं कालिम्पोंग जिले में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है. हालांकि, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है कि नया नियम पहाड़ी जिलों में नहीं लागू किया जाएगा. इसके बाद भी हड़ताल का आह्वान किया गया है.