रेलवे के ताजा आंकड़ों से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उत्तर से पूरब की ओर जाने वाले यात्री ट्रेनों के लेट—लतीफी से काफी परेशान हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने 1 मई से 30 मई के बीच पूरे देशभर में 19,450 ट्रेनें अपने समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंची। उनमें बिहार के ईस्ट सेंट्रल रेलवे, यूपी के नॉर्थ सेंट्रल रेलवे और नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे, कोलकाता स्थि​त ईस्टर्न रेलवे और नई दिल्ली स्थित नार्दर्न रेलवे की करीब 11,600 ट्रेनें लेट रहीं। एक अंग्रेजी अखबार आईई के अनुसार, रिपोर्ट में बताया गया है कि 80 फीसदी ट्रेनों के लेट होने के पीछे की वजहें पटरी में खराबी, संचालन प्रणाली में समस्या और रखरखाव से संबंधित दिक्क्तें हैं, जो रेलवे से जुड़ी हुई हैं। इस पर रेलवे का नियंत्रण है। सामान्य और स्पेशल ट्रेनें ही नहीं, राजधानी ट्रेनों का भी बुरा हाल रहा। पिछले साल अप्रैल और मई के रेकॉर्ड की तुलना इस साल अप्रैल और मई के रेकॉर्ड से की गई तो पाया गया कि राजधानी ट्रेनों के गंतव्य पर समय से पहुंचने की दर कम हो गई है। इसमें 8.61 फीसदी से लेकर 78 फीसदी तक गिरावट देखी गई है। 14 घंटे तक लेट हुई ट्रेन  श्रमजीवी एक्सप्रेस: यह सुपरफास्ट ट्रेन नई दिल्ली से बिहार में राजगीर तक जाती है, जो वाराणसी, पटना होते हुए राजगीर जाती है। यह ट्रेन मई में करीब 22 दिन एक घंटे से भी अधिक समय देर रही। मगध एक्सप्रेस: यह ट्रेन नई दिल्ली से बिहार के इस्लापुर तक जाती है। यह सबसे पुरानी ट्रेनों में से एक है, जो मई में कभी भी समय पर नहीं पहुंची। इसके समय पर पहुंचने की दर लगभग शुन्य फीसदी रही। इस महीने भी ट्रेनें देर से चल रही हैं। नई दिल्ली से गुवाहाटी जाने वाली नॉर्थईस्ट एक्सप्रेस 8 जून को अपने निर्धारित समय से 14 घंटे लेट थी। यह ट्रेन बिहार होकर आती जाती है। उसी दिन आनंद विहार भागलपुर गरीब रथ एक्सप्रेस 10 घंटे विलंब थी। रेलवे ने बतायी ट्रेनों के लेट होने के पीछे की वजह रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) मोहम्मद जमशेद का कहना है ​कि पूरब की ओर जाने वाली ट्रेनें गति प्रतिबंध के कारण लेट हुई हैं। दरअसल कई जगहों पर पटरियों पर पहले से निर्धरित काम चल रहे थे, जिसके कारण ट्रेनों की गति धीमी की गई थी। उनका कहना है कि पूरब की ओर जाने या उधर से आने वाली ट्रेनें लेट हो रही हैं। इससे ट्रेनों के समय पर पहुंचने की दर प्रभावित हुई है। इसका बड़ा कारण यह है कि कई जगहों पर पटरियों का दोहरीकरण हो रहा है, तो कहीं पर मरम्मत की जा रही है। इससे कई क्षेत्रों में ट्रेनों की गति 20 किमी कम हो गई है। जमशेद ने कहा कि ट्रेनों के विलंब होने की पीड़ा अस्थायी है। पटरी दोहरीकरण और मरम्मत का काम जरूरी है, अगर मानसून शुरू हो गया तो फिर यह नहीं हो सकता। रेलवे ने ट्रेनों के विलंब होने के 33 कारण बताए हैं, जिसमें से 7 प्रत्यक्ष रूप से इसके नियंत्रण के बाहर है। जैसे कि अलार्म चेन का खींचा जाना, पटरियों पर लोगों का प्रदर्शन, खराब मौसम, हादसे और कानून व्यवस्था।