पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले का विस्फोटक सच,सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियों का खुलासा

1-2 जनवरी 2016 की रात...पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला. 3 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद एयरबेस को आतंकियों से पूरी तरह मुक्त कराया जा सका. इस ऑपरेशन में 7 भारतीय जवानों की जान गई. इन बेशकीमती जानों को बचाया जा सकता था, अगर एयरबेस की सुरक्षा व्यवस्था में कुछ खामियां नहीं रही होतीं. ये खुलासा एक आंतरिक जांच रिपोर्ट से हुआ है. इंडिया टुडे के हाथ लगी इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि लचर प्लानिंग और सुरक्षा में खामियों की वजह से आतंकियों के लिए एयरबेस में सेंध लगाना आसान हो गया. भारत-पाकिस्तान सरहद के पास स्थित पठानकोट एयरबेस को भारतीय वायुसेना (IAF) का अग्रणी बेस माना जाता है. 1-2 जनवरी 2016 की आधी रात को एयरबेस की सुरक्षा में आतंकियों के सेंध लगाने से हर कोई हैरान रह गया. सुरक्षा खामियों पर प्रधानमंत्री ने जताई थी नाराजगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए टॉप सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की. साथ ही एयरबेस की सुरक्षा में जिस तरह आतंकियों ने सेंध लगाई, उस पर गहरी नाराजगी का इजहार किया. प्रधानमंत्री के सख्त रुख को देखते हुए जांच का आदेश दिया गया. IAF ने पहले जांच का आदेश नहीं दिया था लेकिन उसे फिर ऐसा करने के लिए कदम उठाना पड़ा. जांच एयर वाइस-मार्शल अमित देव से कराई गई. समझा जाता है कि रिपोर्ट में सामने आया कि एयरबेस पर बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल नहीं हुआ. रिपोर्ट में एयरबेस के वरिष्ठ अधिकारियों पर सुरक्षा में खामियों के लिए जिम्मेदारी तय की गई. पूर्व चेतावनी के बावजूद पुख्ता तैयारी नहीं की गई जांच में संभवत: इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि हमले की पहले से ही साफ और सटीक खुफिया सूचना होने के बावजूद एयरबेस की पुख्ता सुरक्षा के लिए विस्तृत प्लान नहीं बनाया गया. जांच रिपोर्ट में पठानकोट एयरबेस के उस वक्त के कमांडर एयर कमाडोर जे एस धमून के नाम का जिक्र भी है. एयर कमाडोर धमून इस्तीफा दे चुके हैं. बता दें कि हमले के दो महीने बाद एयर कमाडोर का पठानकोट से ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन IAF की जांच में कई सुरक्षा चूकों के लिए सवालों में आऩे की वजह से एयर कमाडोर धमून को सेना छोड़नी पड़ी.
यह भी पढ़े :  खबरदारः खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर है सरकार की नजर
उच्च सूत्रों के मुताबिक कुछ और IAF अधिकारी और जवान भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने के लिए अपनी वरिष्ठता खो सकते हैं. एयरबेस के उस वक्त के सिक्योरिटी ऑफिसर की भी कड़ी आलोचना की गई है. कुछ महीने पहले भी लगी थी सुरक्षा में सेंध सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि आतंकियों ने एयरबेस में घुसपैठ के लिए उसी रूट का इस्तेमाल किया, जिस पर हमले से कुछ महीने पहले भी सेंध लगी थी. उस वक्त दिमागी तौर पर अस्थिर एक शख्स एयरबेस की सुरक्षा को भेदते हुए अंदर घुसने में कामयाब हुआ था. सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में इस घटना का उल्लेख किया गया है. जांच रिपोर्ट में सामने आईं सुरक्षा व्यवस्था की कई खामियां रिपोर्ट में कहा गया है कि 2000 एकड़ में फैले फ्रंटलाइन एयरबेस की सुरक्षा में कई खामियां रहीं. इसके अलावा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जिस स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन किया जाता है, उसमें भी चूक हुई. इसकी वजह से आतंकियों को एयरबेस में घुसने और फिर वहां खुद को छुपाने में कामयाबी मिली. रिपोर्ट में खामियों को इंगित करते हुए कहा गया है कि एयरबेस के बाहरी सुरक्षा घेरे पर स्थित पेड़ों और घास की कटाई-छंटाई नहीं की गई. घेरे पर गार्ड पोस्ट का सही रख-रखाव नहीं था. घुसपैठ पर नजर रखने के लिए जिन फ्लड लाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है वो भी सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं.
यह भी पढ़े :  ममता ने गोरखालैंड आंदोलन को 'गहरी जड़ें साजिश' का दावा किया
जांच में ये भी सामने आया कि एयरबेस सिक्योरिटी उन रस्सियों की पहचान करने में भी नाकाम रहीं, जिनका इस्तेमाल एयरबेस की दीवार पर चढ़ने के लिए किया गया. एयरबेस हाई अलर्ट पर था इसके बाद भी आतंकी के कपड़े और छोड़े हुए खाने का सुराग नहीं लगाया जा सका. टीवी टुडे ने इस संदर्भ में रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने का प्रयास किया तो कोई जवाब नहीं मिला. वायुसेनाध्यक्ष ने चिट्ठी में आगाह किया इस महीने के शुरू में वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने आईएएफ अधिकारियों को संबोधित चिट्ठी में उच्च मानकों के पालन में कोताही, फोर्स में पेशेवराना अंदाज की कमी और पक्षपात बढ़ने को लेकर चेतावनी दी थी. IAF के 12,000 अधिकारियों को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया कि फोर्स में ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं है. गरुड़ कमांडो को जम्मू-कश्मीर में किया जा रहा है तैनात भारतीय वायुसेना के स्पेशल दस्ते 'गरूड़ कमांडो' ने पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के दौरान सबसे पहले आतंकियों का सामना किया था. 'गरुड़ कमांडो' को अब भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स के लिए तैनात किया जा रहा है. उच्च सूत्रों ने बताया, "गरुड़ सक्षम फोर्स है लेकिन उन्हें कठिन युद्ध परिस्थितियों के लिए अभ्यस्त होना होगा. जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने गरुड़ कमांडो को जम्मू-कश्मीर में तैनात करने का फैसला किया है."

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *