कृषि वैज्ञानिक और किसानों के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष एमएस स्वामीनाथन ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की कृषि नीतियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि आयोग की कई सिफारिशें लागू की हैं. एक के बाद एक ट्वीट में उन्होंने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र ने किसानों के आयोग की कई सिफारिशें लागू की हैं. मोदी सरकार ने किसान आयोग की बेहतर बीज, सॉयल हेल्थ कार्ड, बीमा, सिंचित क्षेत्र की वृद्धि को लागू किया है. स्वामीनाथन ने मोदी सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की. ग्रामीण महिलाओं ने 50% कृषि कार्य में योगदान दिया है. कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के माध्यम से अपने बाजार कौशल को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं. यूपीए की सरकार के दौरान स्वामीनाथन आयोग ने किसानों की हालत को सुधारने के लिए कई अहम उपायों की सिफारिश की थी, जिसमें भूमि सुधार, कृषि को समवर्ती सूची में डाले जाने के साथ कृषि कर्ज की ब्याज दर को 4 फीसदी किए जाने की सिफारिश की थी. कृषि ऋण अस्थायी रूप से जरूरी: स्वामीनाथन स्वामीनाथन ने इसके साथ ही कहा कि अल्पकाल में कृषि ऋण माफी जरूरी है क्योंकि फिलहाल किसान कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट आने के कारण कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि हालांकि दीर्घकाल में ऋण माफी योजना सुरिक्षत कर्ज प्रणाली उपलब्ध नहीं कराती क्योंकि इससे कृषि बुनियादी ढांचा विकास के लिये पर्याप्त कोष नहीं बचेगा. उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट सरकारों ने कृषि ऋण माफी योजना की घोषणा की. वहीं मध्य प्रदेश में भी किसान यही मांग कर रहे है,. हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन ने कहा, हालांकि अस्थायी रूप से ऋण माफी जरूरी है लेकिन यह दीर्घकालीन कर्ज व्यवस्था को उपलब्ध नहीं कराती. इसका मतलब है कि बैंकों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार करेगी. ऋण माफी का मतलब है कि कृषि बुनियादी ढांचा के लिये पर्याप्त कोष उपलब्ध नहीं होगा. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से अच्छी बारिश नहीं होने, पिछले कुछ साल से भीषण सूखे के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि इस साल फसल अच्छी है, पर किसान खरीद मूल्य से अप्रसन्न हैं और संस्थागत तथा निजी तौर पर लिये कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ हैं. स्वामीनाथन ने कहा कि कर्ज का पुनर्भुगतान नहीं करने से किसानों को खरीफ के लिये नया कर्ज नहीं मिलेगा. इसीलिए वे कर्ज माफी के साथ-साथ उचित खरीद मूल्य चाहते हैं.