GST एक जुलाई से लागू होने जा रहा है. यह कदम टैक्स कलेक्शन और इकनॉमी पर बड़ा असर डालेगा. इंडस्ट्री खुद को इस नए टैक्स ढांचे के लिए तैयार करने में जुटी है. हम आपको बता रहे हैं कि GST कैसे बैंकिंग, इनवेस्टमेंट, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड पर असर डालने जा रहा है. इंश्योरेंस GST लागू होने के बाद लाइफ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस पॉलिसीज के प्रीमियम में बढ़ोतरी होगी. लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज के मामले में सर्विस टैक्स की प्रभावी दरें खरीदी जाने वाली पॉलिसी पर निर्भर करती हैं. टर्म प्लान पर लगने वाला टैक्स 15 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हो जाएगा. अगर आपकी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम टैक्स समेत 20,000 रुपये है तो 1 जुलाई के बाद आपको 600 रुपये और देने होंगे. वहीं, यूलिप्स पर लगाए जाने वाले चार्जेज पर 18 फीसदी का टैक्स लगेगा. ट्रेडिशनल सेविंग्स और इनवेस्टमेंट प्लान के मामले में पहले साल में टैक्स प्रीमियम का 4.5 फीसदी हो जाएगा, जो कि अभी 3.75 फीसदी है. वहीं, दूसरे साल के बाद से यह 2.25 फीसदी होगा. बैंकिंग जीएसटी बैंकिंग सर्विसेज को और महंगा करेगा. इस असर के दो पक्ष हैं. पहला, जिन बैंकिंग सर्विसेज पर सर्विस टैक्स लिया जाता है, उन पर GST का असर रहेगा. इसमें लोन प्रोसेसिंग फीस, फंड ट्रांसफर, एटीएम ट्रांजैक्शंस चार्जेज शामिल हैं. इन सभी पर 18 फीसदी के हिसाब से टैक्स लगेगा, जबकि अभी 15 फीसदी टैक्स लगता है. दूसरा, बचत खाता खोलने और फिक्स्ड डिपॉजिट करने जैसी सर्विसेज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. म्यूचुअल फंड म्यूचुअल फंड अपने निवेशकों पर टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) लगाते हैं. इसमें आमतौर पर फंड मैनेजमेंट चार्जेज और डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन शामिल होता है. TER आमतौर पर 1.25-2.75 फीसदी के बीच होता है. लेकिन गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू होने के साथ TER में 4-7 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होगी. उदाहरण के लिए, अगर मौजूदा TER अगर 1.50 फीसदी है तो निवेशकों को 1 जुलाई से 1.55 फीसदी देना पड़ेगा. गोल्ड को भी जीएसटी के दायरे में रखा गया है. नए टैक्स सिस्टम के तहत गोल्ड भी महंगा होगा, क्योंकि गोल्ड पर 3 फीसदी जीएसटी और गोल्ड ज्वैलरी के मेकिंग चार्जेज पर 5 फीसदी GST लगेगा. अगर आप अभी 60,000 रुपये मूल्य की कोई ज्वैलरी खरीदते हैं तो अभी आपको उस पर 1,800 रुपये के करीब टैक्स देना पड़ता है, लेकिन GST के तहत 2,000 रुपये देने होंगे.