कोटद्वार: करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मित्र की मदद से पिता की हत्या को अंजाम देने वाले पुत्र को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर छह-छह हजार का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पिता की हत्या में पुत्र व उसके साथी को आजीवन कारावास मामला चार मई 2016 का है। घटना वाले दिन शाम करीब चार बजे कोतवाली पुलिस ने ग्राम मानपुर स्थित खंतवाल मोहल्ला निवासी सुरेंद्र डबराल (65 वर्ष) पुत्र ओमप्रकाश का शव उनके कमरे से बरामद किया। शव जमीन में बिछी चटाई के ऊपर पड़ा हुआ था। मृतक के चेहरे पर चोटों के निशान थे और सिर से खून बह रहा था। शरीर में आई चोटों के आधार पर पुलिस को मामला संदिग्ध लगा।  पूछताछ के दौरान मृतक सुरेंद्र के पुत्र विकास डबराल के जवाब से पुलिस संतुष्ट नहीं हुई। इस मामले में विकास के मौसेरे भाई योगेश बलोधी की ओर से पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस जांच शुरू हुई, जिसमें पुलिस ने सुरेंद्र के पुत्र विकास को हत्या के मामले में गिरफ्तार कर किया। साथ ही हत्याकांड को अंजाम देने में विकास के दोस्त मोहल्ले के जितेंद्र सिंह नेगी उर्फ जीतू पुत्र मान सिंह नेगी को भी गिरफ्तार किया।  मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चल रही थी। बयानों में यह बात भी सामने आई कि विकास नशे का आदी था व पिता के नशे के लिए पैसा न दिए जाने के कारण वह नाराज रहता था। इसलिए घटना वाले दिन पिता-पुत्र के बीच झगड़ा हुआ था। शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि तमाम गवाहों को  सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह ने मामले में विकास डबराल व जीतेंद्र सिंह नेगी उर्फ जीतू को हत्या में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।