विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन्स के लिए विदेशी कंपनियों से लीज पर एयरक्राफ्ट लेने में वित्तीय धांधली के संकेत मिले हैं. माल्या ने मौरीशस की उस कंपनी से एयरक्राफ्ट लिए जिसके मालिक माल्या की ही कंपनी यूबी ग्रुप में कर्मचारी रह चुके थे. इन्फोर्समेंट डायरेक्टर ने मौरीशस की दो कंपनियों के डायरेक्टर हितेश पटेल और उदय नायक को इस संबंध में समन भेजा है. म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट ट्रीटी के तहत मुंबई की एक विशेष अदालत में मौरीशस से सूचना लेने के लिए आवेदन भी दिया गया है. ईडी के चार्जशीट के मुताबिक, माल्या ने आईडीबीआई बैंक से 900 करोड़ रुपए का लोन लिया था, लेकिन इस पैसे का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों को एयरक्राफ्ट लीज के बदले दे दिए गए. माल्या ने अपनी सुविधा के मुताबिक , एयरक्राफ्ट लीज पर लेने के लिए कुछ चुनिंदा कंपनियों का चयन किया, भले ही उनके चार्ज बाकी कंपनियों से अधिक थे. जांच में सामने आया है कि माल्या मौरीशस की कंपनी एम/एस वेलिंग लिमिटेड और एम/एस वेलिंग सचीदानंद लिमिटेड से कई एयरक्राफ्ट लीज पर लेते थे. महीने के रेंट के तौर पर कंपनियों को क्रमश: 1,99,164 और 1,98,557 डॉलर दिया जाता था जो उसी क्लास के एयरक्राफ्ट के लिए दूसरी कंपनियों के मुकाबले अधिक था. किंगफिशर एयरलाइन्स लीज से जुड़े हुए दस्तावेज एग्रीमेंट उपलब्ध कराने में नाकाम रही है. हालांकि, ईडी को जब तक विदेशी कंपनियों से जानकारी नहीं मिलती, जांच पूरा करना मुश्किल होगा. ईडी ने माल्या के बैंक से लोन लेने की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं. कहा गया है कि माल्या ने अपने देश की संपत्ति की जानकारी छुपाई और जानबूझकर विदेशी प्रॉपर्टी को गारंटी के तौर पर दिया ताकि बैंकों को विदेशी संपत्तियों को हासिल करने में मुश्किलें हो.