लंदन

ब्रिटेन में समय से 3 साल पहले ही हुए चुनावों में खराब प्रदर्शन को लेकर टरीजा मे अब अपने पार्टी सदस्यों के निशाने पर हैं। मे के खिलाफ उनकी कंज़रवेटिव पार्टी में बगावत के सुर उभरने लगे हैं। पार्टी सदस्यों ने टरीजा को यह भी साफ कर दिया है कि अब सरकार में उनके गिनती के दिन बचे हैं। चुनाव में बहुमत न मिलने के बाद टरीजा को अपने दो करीबी सहयोगियों को पार्टी से हटाने को मजबूर होना पड़ा। जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ निक टिमथी और फिओना हिल की विदाई के बाद अब पार्टी नेताओं ने टरीजा मे को भी चेतावनी दी है कि गुरुवार को हुए चुनाव के बाद संसद में बहुमत खोने से अब उनकी भी विदाई हो सकती है। बता दें कि मे ने टिमथी और हिल पर भरोसा कर के ही मध्यावधि चुनाव करवाने का फैसला लिया था। टिमथी ने कहाकि वह कंज़रवेटिव पार्टी के घोषणापत्र की जिम्मेदारी लेते हैं, जिसमें वृद्धों के लिए सोशल केयर स्कीम भी शामिल थी। इस स्कीम से नाराज कई वोटर्स ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। टिमथी और हिल के इस्तीफे की खबर उस वक्त आई जब मे अपने कैबिनेट मंत्रियों के नाम तय कर रही हैं और उन्होंने यह भी घोषणा कर दी है कि उनके मौजूदा टॉप 5 मंत्री अपने पदों पर बने रहेंगे। चुनाव के हैरान कर देने वाले नतीजों ने पार्टी में टरीजा मे के खिलाफ कई धड़े पैदा कर दिए हैं। यूरोपियन यूनियन से अलग होने की प्रक्रिया 9 दिनों में शुरू होने वाली है और ऐसे में टरीजा के ऊपर पार्टी को एक सूत्र में बांधने की भी जिम्मेदारी आ गई है। ब्रिटेन के जाने-माने अखबार 'सन' के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह तय किया है कि वे जल्द से जल्द मे से छुटकारा पा लेंगे। हालांकि फिलहाल इसके लिए 6 महीने इंतजार किया जाएगा क्योंकि पार्टी को यह भी डर सता रहा है कि किसी भी तरह की अंदरूनी कलह का फायदा उठाकर लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन सत्ता में आ सकते हैं। पार्टी के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि फिलहाल मे अपने पद पर बनी रहेंगी। मे ने ब्रिटेन को ईयू से बाहर करने के अपने प्लान को लेकर बहुमत हासिल करने के इरादे से मध्यावधि चुनाव करवाए लेकिन उनकी पार्टी ही इस मुद्दे पर कई धड़ों में बंटी हुई है। इसका अर्थ है कि अगले कई सालों में भी ब्रिटेनवालों को यह नहीं पता होगा कि देश के व्यापार नियम क्या होने वाले हैं। चुनाव नतीजों के बाद ब्रिटिश पाउंड भी डॉलर की तुलना में कमजोर पड़ गया है। हालांकि, मे अगर ब्रिटेन को सफलतापूर्वक ईयू से बाहर निकाल लेती हैं तो उन्हें पार्टी का सपॉर्ट भी मिल सकता है।