मुंबई. स्कॉर्पीन क्लास की दूसरी सबमरीन खांदेरी को गुरुवार को मझगांव में नेवी में शामिल किया गया। बता दें कि नेवी फ्रांस के कॉन्ट्रैक्टर DCNS की मदद से मुंबई के मझगांव पोर्ट पर स्कॉर्पीन क्लास की 6 सबमरीन तैयार कर कर रही है। इस पर 23,400 करोड़ रुपए (3.5 बिलियन डॉलर) खर्च हो रहे हैं। इससे पहले इसी क्लास की कलवरी सबमरीन को समुद्र में उतारा गया था।

सबमरीन खांदेरी की खासियत

- यह दुश्मन का पता लगते ही उस पर गाइडेड हथियारों से हमला कर सकती है।
- यह पानी के नीचे से और सतह से दोनों तरह से दुश्मन पर हमला कर सकती है। - इससे टॉरपीडो के साथ-साथ ट्यूब से भी एंटी शिप मिसाइलें दागी जा सकती हैं। - इसकी स्टैल्थ टेक्नीक इसे दूसरी सबमरीन्स के मुकाबले शानदार व बेजोड़ बनाती है। - इस सबमरीन वे सभी काम कर सकती है, जो दूसरी सबमरीन्स करती हैं। जैसे- एंटी अंडरग्राउंड वॉर, एंटी सबमरीन वॉर, इंटेलिजेंस इनपुट्स देना और सर्विलांस करना।

कई टेस्ट से पास करना होगा

- 12 जनवरी को समुद्र में उतारे जाने के बाद खांदेरी सबमरीन को दिसंबर 2017 तक कई मुश्किल टेस्ट से गुजरना होगा।
- इसमें बंदरगाह और समुद्र दोनों तरह के टेस्ट शामिल हैं। भारतीय नौसेना में पहली खांदेरी पनडुब्बी 6 दिसंबर 1986 में कमीशन हुई थी।
- करीब 20 साल तक देश की सेवा करने के बाद 18 अक्टूबर 1989 इसे नेवी से रिटायर किया गया।