म्यामांर से सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए सीमा पर एहतियात जरूरी

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को असम राइफल्स के जवानों से संवेदनशील भारत-म्यामांर सीमा पर एहतियात बरतने के लिए कहा ताकि पड़ोसी देश के साथ भारत के सौहार्दपूर्ण संबंध खराब न हो। भारत की सबसे पुराने अर्द्धसैन्य बल की 46वीं बटालियन के मुख्यालय पर सैनिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि म्यामांर के साथ देश के संबंध मैत्रीपूर्ण है इसलिए अंतरराष्‍ट्रीय सीमा की रक्षा करते हुए अत्यधिक एहतियात बरतनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि असम राइफल्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस संबंध को नुकसान न पहुंचे। आपको एहतियात बरतनी चाहिए ताकि हमारे संबंधों में गर्मजोशी बनी रहे। गृह मंत्री ने कहा कि पूरी तरह से सील सीमा के बजाय ऐसी सीमा की रक्षा करना ज्यादा मुश्किल है जो खुली या संवेदनशील है तथा इसमें धैर्य, दृढ़ निश्चय और बुद्धिमानी की जरूरत होती है।

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उन्होंने कहा, खासतौर से उस स्थिति में जहां लोगों को पड़ोसी देश में जाने की अनुमति है वहां असम राइफल्स का काम मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में असम राइफल्स अच्छा काम कर रही है जिसकी सराहना की जानी चाहिए। सिंह ने कहा कि भारत-म्यामांर सीमा के बहादुर जवान शौर्य और समर्पण से भारत-म्यामांर सीमा की रक्षा करते हैं। मैं उन्हें देश की सेवा के लिए बधाई देता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि असम राइफल्स को सीमा की सुरक्षा करते हुए बहु आयामी भूमिका निभानी पड़ती है जिसमें पूर्वोत्‍तर के लोगों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाना शामिल है ताकि उसे विभिन्न तरह की सूचनाएं मिल सकें।

गृह मंत्री ने हाल ही में लॉन्च किए गए मोबाइल एप का भी जिक्र किया जहां अर्द्धसैन्य बल के जवान अपनी समस्याएं लिख सकते हैं और उनका समाधान मांग सकते हैं। उन्होंने कहा, मैंने निजी तौर पर इस प्लेटफॉर्म की जांच करने का फैसला किया है ताकि आपकी समस्याएं हल हो सकें। सिंह ने कहा कि अर्द्धसैन्य बलों के शहीद सैनिक के परिजन को कम से कम एक करोड़ रुपये देने के लिए कदम उठाए गए हैं।

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उन्होंने कहा कि असम राइफल्स उन करीब 300 म्यामांर शरणार्थियों की वापसी की योजना बना रही है जो हाल ही में सीमा पार से आए। असम राइफल्स 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यामांर सीमा की रक्षा करती है जो अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है।

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