भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है. विपक्ष के पास भी कोविंद का विरोध करने की काफी कम ही वजह हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि वह ही अगले राष्ट्रपति होंगे. अगर विपक्ष अपनी ओर से कोई उम्मीदवार का ऐलान नहीं करता है, तो कोविंद निर्विरोध चुने जाने वाले देश के दूसरे राष्ट्रपति होंगे. इससे पहले 1977 में नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे.

क्यों है संभावना? दरअसल, कोविंद के निर्विरोध राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं काफी हद तक हैं. एनडीए के पास संख्याबल भी मजबूत है, वहीं मायावती ने भी साफ तौर पर कहा है कि अगर कोई और दलित चेहरा सामने नहीं आता है तो वह कोविंद का ही समर्थन करेंगे. इसका मतलब साफ है कि कोविंद के राष्ट्रपति बनने की राह साफ है.

कभी ए.पी.जे. कलाम की भी थी इच्छा? भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी एक बार निर्विरोध राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई थी. दरअसल, उनके पहला कार्यकाल पूरा होने के बाद जब उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की बात हो रही थी, तो उन्होंने कहा था कि अगर सभी लोग मेरे हक में होंगे तभी वह राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए तैयार होंगे. हालांकि बाद में उन्होंने चुनाव ना लड़ने का फैसला किया था.

क्या दांव चल सकता है विपक्ष? राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के खिलाफ विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतार सकता है. वाम दलों में सूत्रों ने सोमवार की रात यह बात कही. गैर-एनडीए दलों के 22 जून को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक करने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे, भारिपा बहुजन महासंघ के नेता और डॉ. बी आर अंबेडकर के पौत्र प्रकाश यशवंत अंबेडकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र और सेवानिवृत नौकरशाह गोपालकृष्ण गांधी और कुछ अन्य नामों पर विपक्षी पार्टियां विचार कर रही हैं.