लखनऊ/नई दिल्‍ली : समाजवादी पार्टी में चल रही कलह के बीच अखिलेश यादव कैम्प मंगलवार को चुनाव आयोग पहुंचेगा। इसकी अगुआई रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल, किरणमय नंदा और अभिषेक मिश्रा कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो अगर अखिलेश को 'साइकिल' चुनाव चिह्न नहीं मिलता है तो वे मोटरसाइकिल को सिंबल के तौर पर अपना सकते हैं।

निर्वाचन आयोग में है चुनाव चिह्न का मामला...

samajwadi partyमीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टीम अखिलेश को मालूम है कि चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को जब्त कर सकता है। ऐसे में, अखिलेश खेमा मोटरसाइकिल को अपना चुनाव चिह्न रखने का मन बना चुका है। वहीं, अखिलेश खेमा अपनी स्पेशल नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग में पास हुए प्रस्ताव की जानकारी चुनाव आयोग को देगा।

 

अखिलेश को बनाया गया था पार्टी का अध्यक्ष

बता दें, रविवार को लखनऊ में हुए सपा के अधिवेशन में अखिलेश यादव को पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, इस अधिवेशन को मुलायम सिंह ने अवैधानिक बताते हुए रामगोपाल को पार्टी से 6 साल के लिए बाहर कर दिया था।बताया जा रहा है कि अखिलेश खेमा आयोग के सामने ये साबित करने की कोशिश करेगा कि असली समाजवादी पार्टी की अगुआई अखिलेश यादव कर रहे हैं। ऐसे में, चुनाव चिह्न साइकिल पर अखिलेश गुट का हक बनता है, लेकिन दोनों गुटों के दावे की जांच में चुनाव आयोग को कुछ महीने का वक्त लग सकता है।

साइकिल चुनाव चिह्न को जब्त कर सकता है चुनाव आयोग

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का मानना है कि चुनाव चिह्न पर फैसला देने में चुनाव आयोग को वक्त लग सकता है।ऐसे में हो सकता है कि आयोग साइकिल सिंबल को जब्त कर दोनों धड़ों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित कर दे।

पार्टी सिंबल को लेकर लड़ाई क्यों?

दरअसल, अखिलेश और मुलायम ने यूपी चुनाव के मद्देनजर विधानसभा कैंडिडेट्स की अलग-अलग लिस्‍ट जारी की है। अब पार्टी के इस झगड़े में दोनों ही खेमे पार्टी के सिंबल (साइकिल) से चुनाव लड़ना चाहते हैं।इसी को लेकर सोमवार को दिल्‍ली में आगे की रणनीति तय हो सकती है।