लखनऊ. अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। हालांकि, विवाद के बीच मुलायम के करीबियों में गिने जाने वाले कई नेता अभी भी मुलायम के साथ हैं। इनमें बेनी प्रसाद वर्मा, अमर सिंह और जया प्रदा जैसे नाम शामिल हैं। दूसरी ओर, कुछ नेता अखिलेश में सपा का भविष्य देख रहे हैं तो कुछ अपने स्वार्थ की वजह से भी सीएम के साथ हैं।

नेता जो अब मुलायम के बजाए अखिलेश के सपोर्ट में हैं।

- 'सीनियर नेता ये जान चुके हैं कि इस समय अखिलेश के साथ संख्या बल और उनकी लोकप्रियता चरम पर है। ऐसे में उनका और उनके परिवार का भविष्य अखिलेश के साथ ही सुरक्षित है।' - 'जो लोग इस समय शिवपाल गुट के हैं, वही मुलायम के साथ हैं। ऐसे लोग जानते हैं कि अगर वे अखिलेश के साथ गए तो भी उनका भविष्य सेफ नहीं रहेगा। यही वजह है कि उन्हें अभी भी मुलायम में एक उम्मीद नजर आ रही है।'

#किरनमय नंदा

kironmoy nanda- किरनमय, मुलायम के पुराने सहयोगियों में से रहे हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। वह मुलायम के साथ 1996 से जुड़े हैं। - किरनमय अपनी पार्टी 'वेस्ट बंगाल समाजवादी पार्टी' का विलय भी सपा में कर चुके हैं। अब बंगाल में सपा का परचम लहराने की जिम्मेदारी किरनमय पर है।

 अखिलेश के साथ फायदा-

- किरनमय शुरू से ही अखिलेश के सपोर्ट में रहे हैं। वो अखिलेश को पार्टी का भविष्य भी बताते रहे हैं।

#अहमद हसन

ahmad hasan- पुलिस सेवा से अहमद हसन 1985 में रिटायर हो गए। इसके बाद जब मुलायम रक्षा मंत्री रहे (1996 से 1998 तक), तब हसन मुलायम के संपर्क में आए।
- इसके बाद से वह लगातार मुलायम से जुड़े रहे।

अखिलेश के साथ फायदा-

- अहमद हसन भी पार्टी का भविष्य अखिलेश यादव के हाथ में देख रहे हैं।

#राजा भैया

rajabhaiya samajwadi- राजा भैया निर्दलीय विधायक हैं, लेकिन वह जब सपा से जुड़े तो सपा से ही जुड़े रह गए। वह ठाकुरों के नेता माने जाते हैं।

अखिलेश के साथ फायदा-

- आजम की ही तरह राजा भैया भी न्यूट्रल हैं। वे भी किसी खेमे में नहीं हैं। - इस समय उनका झुकाव भी अखिलेश यादव की तरफ है।

#आजम खान

Azam_Khan - आजम खान सपा के फाउंडर मेंबर्स में शामिल रहे हैं। - उनको पार्टी का मुस्लिम फेस माना जाता है। इसके अलावा वे अमर सिंह के धुर विरोधी रहे हैं।

अखिलेश के साथ फायदा:

- फिलहाल आजम खान किसी खेमे में नहीं हैं। उनके पास उनका मुस्लिम वोट बैंक है। - ऐसे में आजम को हर खेमे की जरूरत है। हालांकि, जानकारों की राय है कि उनका झुकाव अखिलेश की तरफ है।

#राजेंद्र चौधरी

akhilesh-yadav-rajendra-chaudhry- राजेंद्र का रिश्ता भी मुलायम से पुराना है। दोनों ही चौधरी चरण सिंह के समय से जुड़े हुए हैं। - जब 2012 में सपा सरकार बनी, वह तब से साए की तरह अखिलेश के साथ चलने लगे।

अखिलेश के साथ फायदा-

- अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटते ही राजेंद्र को भी प्रदेश प्रवक्ता पद से हटा दिया गया। - ऐसे में अब उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य अखिलेश के हाथों में ही सेफ नजर आता है।