ये है उत्तराखंड के सेंटा क्लोज, दूसरों की खुशी में मिलती है इनको खुशी

देहरादून: ‘खुश रहने की अनिवार्य शर्त ये है कि आप दूसरों को खुशियां बांटें।’ यही है असल जिंदगी के सेंटा क्लोज स्वामी एस.चंद्रा का फलसफा। बल्कि यूं कहें कि उन्होंने अब इसे जीवन का मकसद बना लिया है। खुशियां बांटने को क्रिसमस का त्योहार जरूरी नहीं, बल्कि उनके लिए हर रविवार और ड्यूटी के दौरान भोजनावकाश ही क्रिसमस है।ये है उत्तराखंड के सेंटा क्लोज, दूसरों की खुशी में मिलती है इनको खुशी सर्वे ऑफ इंडिया में ड्राफ्ट्समैन पद पर कार्यरत देहरादून की इंदिरा कॉलोनी निवासी स्वामी चंद्रा बीते एक दशक से राजकीय प्राथमिक विद्यालय के गरीब बच्चों के साथ ज्ञान की खुशी बांट रहे हैं। वह इन बच्चों को सामान्य ज्ञान व हिंदी पढ़ाते हैं तो अवकाश के दिन बच्चों को पिकनिक पर ले जाना, प्रतियोगिताएं आयोजित कराना जैसी गतिविधियां भी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। स्वामी एस.चंद्रा बताते हैं कि सेवा करने का भाव उनके अंदर पिता तो देखकर आया। वह बताते हैं कि ‘वैसे तो 1988 से ही इस कार्य से जुड़ गए थे। तब कुछ लोगों की मदद से अलग-अलग वर्ष में 19 बच्चों को हाईस्कूल कराया’। वर्ष 2007 में चंद्रा ने इंदिरा कॉलोनी स्थित इस प्राथमिक विद्यालय को गोद लिया था। हर दिन भोजनावकाश में वह एक घंटा और शनिवार को पूरे दिन बच्चों को पढ़ाते हैं और प्रत्येक रविवार को बच्चों को पिकनिक ले जाना नहीं भूलते। यही वजह है कि आज जहां सरकारी विद्यालयों में दस बच्चे भी नहीं मिलते, वहीं इस विद्यालय 68 बच्चे अध्ययनरत हैं।  ये सभी बच्चे ऐसे तंगहाल परिवारों से हैं, जहां कई अभिभावकों को उनकी जन्मतिथि तक मालूम नहीं। लेकिन, विद्यालय के दस्तावेजों में दर्ज तारीख के हिसाब से हर बच्चे के जन्मदिन पर केक काट जाता है। बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए समय-समय पर खेलकूद, ड्राइंग पेटिंग व अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से चंद्रा बच्चों की ड्रेस, पाठ्य सामग्री व अन्य जरूरतों को पूरा करते हैं। 
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परिवार करता है सहयोग

चंद्रा बताते हैं कि उनके दो बेटे और एक बेटी है। पत्नी निशा चंद्रा गृहणी हैं, लेकिन घर के काम से फुर्सत मिलने पर वह भी चंद्रा की मदद करती हैं।

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