भारत सरकार के कानून मंत्रालय ने देश के तीन उच्च न्यायालयों में 11 न्यायाधीशों को नियुक्त करने की अनुमति दे दी है. कानून मंत्रालय से जुड़े सूत्रों से CNN-News18 को खबर मिली है कि इन 11 न्यायाधीशों की नियुक्ति मद्रास, छत्तसीगढ़ और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में की जानी है. इनमें से 6 जजों को मद्रास, 3 को छत्तीसगढ़ और दो जजों को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया है. हैरानी की बात ये है कि नियुक्ति के लिए सिर्फ एक सप्ताह का वक्त दिया गया है. मद्रास हाई कोर्ट में 26 सीटें खाली थीं, जिसमें से 6 जजों की नियुक्ति को हरी झंडी मिली है. इन छह जजों का नाम सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने पहले भी प्रस्तावित किया था लेकिन सरकार ने वे नाम कॉलेजियम के पास वापस भेज दिए थे और इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा था. अब 18  महीने के विलंब के बाद सरकार ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी है. छतीसगढ़ हाई कोर्ट में 26 जजों को नियुक्त करने की अनुमति मिली थी. यहां अभी भी आधी सीटें खाली हैं. वहीं पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 85 जजों की नियुक्ति की मांग की थी,  यहां 39 जजों की सीट अभी भी खाली है. सरकार ने दो न्यायिक अधिकारियों को हाई कोर्ट के जज के रूप में प्रमोट किया है. देश भर में 419 न्यायाधीश हैं, जबकि विभिन्न न्यायालयों में कुल 1079 न्यायाधीशों की जरुरत है. इसका मतलब है कि देश में 39% जजों की कमी है. उधर इलाहबाद हाई कोर्ट में भी 160 न्यायधीशों की जगह खाली है. कॉलेजियम ने जो लिस्ट प्रस्तावित की है उसमें 20 वकील हैं और 9 न्यायिक अधिकारी हैं. कॉलेजियम द्वारा दी गई 44 नामों की सूची को सरकार ने कई बार पुनर्विचार करने के लिए कहा, जिसके बाद कॉलेजियम ने 20 जजों के नामों की एक सूची दी जिसमें 19 नाम वही थे जो कॉलेजियम पहले भी दे चुका है. गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धि बताया है.