लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर जुनैद मट्टू सहित तीन आतंकियों की लाश शनिवार को मिल गई. दक्षिण कश्मीर के अरवानी गांव में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों को उनकी लाश मिली. मट्टू के साथ मारे गए दो अन्य आतंकियों की पहचान नासिर वानी और आदिल मुश्ताक मीर के रूप में हुई है. शुक्रवार को कुलगाम में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के बाद उनके मारे जाने का दावा किया गया था. शुक्रवार को हुई थी मुठभेड़ बता दें कि कुलागम के अरवानी गांव के इदगाह मोहल्ला में शुक्रवार को फायरिंग हुई थी. यहां तीनों आतंकवादी एक इमारत में छुपे थे. सेना ने इमारत को ढहा दिया था और तीनों को मार गिराया. वहीं, आतंकियों को बचाने के ​लिए स्थानीय लोग सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी भी कर रहे थे. सुरक्षा बलों के विरोध में लोगों को एकजुट करने के लिए तेजी से आॅडियो मैसेज भी भेजे रहे थे जिसके चलते अनंतनाग और कुलगाम में इंटरनेट सेवा बाधित कर दी गई थी. अन्य जिलों में इंटरनेट स्पीड को 128 केबीपीएस तक कर दिया गया था. साल 2014 में आतंकवादी संगठन से जुड़ा था
कुलगाम के खुदवानी का रहने वाला 24 साल का मट्टू जून 2014 में आतंकवादी संगठन से जुड़ा था. पिछले साल जून में अनंतनाग बस स्टैंड पर दिन में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद वह चर्चा में आया था. इसके बाद वह लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़ गया और दक्षिण कश्मिर का कमांडर बन गया था. वहीं, मीर पंपोर और वानी शोपियन जिले का रहने वाला था. 10 लाख का था इनाम जुनैद खतरनाक आतंकियों में गिना जाता है. सुरक्षाबल को लंबे समय से उसकी तलाश थी. जुनैद मट्टू पर 10 लाख का इनाम है. वो पहले भी सुरक्षाबलों के हाथों से बचकर भागता रहा है. ऐसे में अगर इस आॅपरेशन में जुनैद पकड़ा जाता है तो ये सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी होगी. जुनैद ने 20 साल की उम्र से ही आतंक की दुनिया में अपने पैर रख लिए थे. उसे कश्मीर का दूसरा बुरहान वानी भी कहा जाता है.